Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.7.14: मैं मित्र के रूप में तुम्हारे हित के लिए तुम्हें उपदेश दे रहा हूँ। मैं तुम्हें उपदेश नहीं दे रहा हूँ। मेरी मित्रता का आदर करते हुए तुम्हें कभी शोक नहीं करना चाहिए।॥14॥ | ramayan सर्ग 4.7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं मित्र के रूप में तुम्हारे हित के लिए तुम्हें उपदेश दे रहा हूँ। मैं तुम्हें उपदेश नहीं दे रहा हूँ। मेरी मित्रता का आदर करते हुए तुम्हें कभी शोक नहीं करना चाहिए।॥14॥
I am giving you advice for your benefit as a friend. I am not preaching to you. Respecting my friendship, you should never grieve.'॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥