श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.66.34 
स इदानीमहं वृद्ध: परिहीनपराक्रम:।
साम्प्रतं कालमस्माकं भवान् सर्वगुणान्वित:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ। मेरा पराक्रम क्षीण हो गया है। इस समय हम लोगों में केवल आप ही सभी प्रकार के गुणों से संपन्न हैं। 34.
 
‘Now I have grown old. My prowess has diminished. At this time, among us, you alone are blessed with all kinds of virtues. 34.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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