श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  4.66.29-30h 
स त्वं केसरिण: पुत्र: क्षेत्रजो भीमविक्रम:॥ २९॥
मारुतस्यौरस: पुत्रस्तेजसा चापि तत्सम:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आप केसरी के पुत्र हैं। आपका पराक्रम शत्रुओं को भयभीत करने वाला है। आप वायुदेव के पुत्र हैं, अतः तेज की दृष्टि से भी आप उनके समान हैं।
 
‘Thus you are the son of Kesari. Your prowess is terrifying for the enemies. You are the biological son of Vayudev, hence you are equal to him in terms of brilliance as well.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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