श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.66.2 
वीर वानरलोकस्य सर्वशास्त्रविदां वर।
तूष्णीमेकान्तमाश्रित्य हनूमन् किं न जल्पसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे वानर लोक के नायक और समस्त शास्त्रज्ञों में श्रेष्ठ हनुमान! आप एकांत में चुपचाप क्यों बैठे हैं? कुछ बोलते क्यों नहीं?॥ 2॥
 
Hanuman, the hero of the monkey world and the best among all the scholars of scriptures! Why are you sitting quietly in solitude? Why are you not saying anything?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)