श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.66.19 
महासत्त्वो महातेजा महाबलपराक्रम:।
लङ्घने प्लवने चैव भविष्यति मया सम:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह बड़ा धैर्यवान, बड़ा तेजवान, बड़ा बलवान, बड़ा साहसी होगा और उछलने-कूदने में मेरे समान होगा।॥19॥
 
He will be of great patience, great brilliance, great strength, great courage and will be like me in jumping and leaping.'॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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