अञ्जनाया वच: श्रुत्वा मारुत: प्रत्यभाषत।
न त्वां हिंसामि सुश्रोणि मा भूत् ते मनसो भयम्॥ १७॥
अनुवाद
अंजना के वचन सुनकर वायुदेव ने कहा, "सुश्रोणि! मैं आपके एकपत्नीव्रत को नहीं तोड़ रहा हूँ। अतः आपके मन से यह भय दूर हो जाना चाहिए॥ 17॥
Hearing Anjana's words, the wind-god replied, "Sushroni! I am not breaking your vow of having only one wife. Therefore, this fear should go away from your mind.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥