श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.65.9 
सुषेणस्तु महातेजा: सत्त्ववान् कपिसत्तम:।
अशीतिं प्रतिजानेऽहं योजनानां पराक्रमे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद धैर्यवान एवं पराक्रमी सुषेण ने कहा, 'मैं एक छलांग में अस्सी योजन की यात्रा करने का वचन देता हूँ।'
 
After this the patient and mighty Sushen said, 'I promise to travel eighty yojanas in one leap.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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