श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.65.8 
ततस्तत्र महातेजा द्विविद: प्रत्यभाषत।
गमिष्यामि न संदेह: सप्ततिं योजनान्यहम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली द्विविद ने कहा, 'मैं सत्तर योजन तक जाऊँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।'
 
Thereafter the mighty Dwivid said, 'I shall go upto seventy Yojanas, there is no doubt about it.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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