श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.65.7 
मैन्दस्तु वानरस्तत्र वानरांस्तानुवाच ह।
योजनानां परं षष्टिमहं प्लवितुमुत्सहे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वीर वानर मैन्द ने वानरों से कहा - 'मैं एक ही छलांग में साठ योजन कूदने का उत्साह रखता हूँ।'
 
Thereafter the brave monkey Maind said to the monkeys - 'I am enthusiastic about jumping sixty yojanas in one leap.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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