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श्लोक 4.65.5  |
ऋषभो वानरस्तत्र वानरांस्तानुवाच ह।
चत्वारिंशद् गमिष्यामि योजनानां न संशय:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् महामुनि कपिवार ने वानरों से कहा, 'मैं चालीस योजन तक जाऊँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।' |
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| Thereafter the great sage Kapivaara said to the monkeys, 'I shall go upto forty yojanas, there is no doubt about it.' |
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