श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.65.25 
मूलमर्थस्य संरक्ष्यमेष कार्यविदां नय:।
मूले हि सति सिध्यन्ति गुणा: सर्वे फलोदया:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘कर्म के मूल की रक्षा करनी चाहिए। कर्म के तत्त्व को जानने वाले विद्वानों की यही नीति है; क्योंकि मूल के उपस्थित होने पर ही समस्त गुण सफल होते हैं।॥25॥
 
‘The root of the work must be protected. This is the policy of scholars who know the essence of work; because all qualities are successful only when the root is present.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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