श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.65.20 
तमुवाच हरिश्रेष्ठं जाम्बवान् वाक्यकोविद:।
ज्ञायते गमने शक्तिस्तव हर्यृक्षसत्तम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब वार्तालाप कला में चतुर जाम्बवान् ने रीछ-वानरों में श्रेष्ठ अंगद से कहा- रीछ-वानरों में श्रेष्ठ राजकुमार! हम आपकी गतिशक्ति से भली-भाँति परिचित हैं। 20॥
 
Then Jambavan, who was clever in the art of conversation, said to Angada, the best among the bears and monkeys – the best prince among bears and monkeys! We are well aware of your power of movement. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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