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श्लोक 4.65.17  |
सम्प्रत्येतावदेवाद्य शक्यं मे गमने स्वत:।
नैतावता च संसिद्धि: कार्यस्यास्य भविष्यति॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| इस समय मुझमें इतनी ही शक्ति है कि मैं स्वयं चल सकूँ, परन्तु इस गति से मैं समुद्र पार करने का यह वर्तमान कार्य पूरा नहीं कर सकता।॥17॥ |
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| At present I have only this much strength to walk on my own, but at this speed I cannot accomplish this current task of crossing the ocean.'॥ 17॥ |
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