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ramayan 4.64.22: हे वानरश्रेष्ठ! तुममें से किसी की भी गति कभी नहीं रुकती। इसलिए जिसमें भी समुद्र पार करने की शक्ति हो, वही बताए॥22॥   |   ramayan सर्ग 4.64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.64.22 
नहि वो गमने भङ्ग: कदाचित् कस्यचिद् भवेत्।
ब्रुवध्वं यस्य या शक्ति: प्लवने प्लवगर्षभा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! तुममें से किसी की भी गति कभी नहीं रुकती। इसलिए जिसमें भी समुद्र पार करने की शक्ति हो, वही बताए॥22॥
 
O best of the monkeys! The movement of none of you ever stops. Therefore, whoever has the strength to cross the ocean, he should tell it.'॥ 22॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे चतु:षष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें चौंसठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)