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ramayan 4.64.20: अंगद की यह बात सुनकर कोई भी कुछ नहीं बोला। सारी वानर सेना वहीं निश्चल सी खड़ी रही।   |   ramayan सर्ग 4.64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.64.20 
अङ्गदस्य वच: श्रुत्वा न कश्चित् किंचिदब्रवीत्।
स्तिमितेवाभवत् सर्वा सा तत्र हरिवाहिनी॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अंगद की यह बात सुनकर कोई भी कुछ नहीं बोला। सारी वानर सेना वहीं निश्चल सी खड़ी रही।
 
Hearing this from Angad, no one said anything. The entire monkey army remained there like stillness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)