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ramayan 4.64.2: सम्पाती के वचनों से उन्हें रावण के निवास और उसके भावी विनाश की जानकारी मिली। यह सुनकर सभी वानर हर्ष से भर गए और मन में सीताजी के दर्शन की इच्छा लेकर समुद्र तट पर आए।   |   ramayan सर्ग 4.64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.64.2 
सम्पातेर्वचनं श्रुत्वा हरयो रावणक्षयम्।
हृष्टा: सागरमाजग्मु: सीतादर्शनकांक्षिण:॥ २॥
 
 
अनुवाद
सम्पाती के वचनों से उन्हें रावण के निवास और उसके भावी विनाश की जानकारी मिली। यह सुनकर सभी वानर हर्ष से भर गए और मन में सीताजी के दर्शन की इच्छा लेकर समुद्र तट पर आए।
 
From the words of Sampati they got information about the residence of Ravana and his future destruction. On hearing this all the monkeys were filled with joy and came to the seashore with the desire of seeing Sitaji in their hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)