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श्लोक 4.64.18  |
कस्य प्रसादाद् रामं च लक्ष्मणं च महाबलम्।
अभिगच्छेम संहृष्टा: सुग्रीवं च वनौकसम्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| ‘किसकी कृपा से हम लोग भगवान् राम, पराक्रमी लक्ष्मण और वीर वानर सुग्रीव के पास आनन्दपूर्वक जा सकेंगे?॥18॥ |
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| ‘By whose grace we will be able to go with joy to Lord Rama, the mighty Lakshmana and the brave monkey Sugreeva?॥ 18॥ |
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