vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना
»
श्लोक 11
श्लोक
4.64.11
तस्यां रात्र्यां व्यतीतायामङ्गदो वानरै: सह।
हरिवृद्धै: समागम्य पुनर्मन्त्रममन्त्रयत्॥ ११॥
अनुवाद
रात्रि बीत जाने पर अंगद ने बड़े-बड़े वानरों के साथ मिलकर पुनः विचार-विमर्श आरम्भ किया।
After the night had passed, Angada, along with the big monkeys, began his deliberations once again.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd