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श्लोक 4.64.1  |
आख्याता गृध्रराजेन समुत्प्लुत्य प्लवङ्गमा:।
संगता: प्रीतिसंयुक्ता विनेदु: सिंहविक्रमा:॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| गिद्धराज सम्पाती के ऐसा कहने पर सिंह के समान पराक्रमी समस्त वानर अत्यन्त प्रसन्न हो गए और एक साथ उछलने-कूदने और गर्जना करने लगे ॥1॥ |
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| At this statement by the vulture king Sampati, all the monkeys as valiant as lions became very happy and began jumping and roaring together. ॥1॥ |
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