श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 63: सम्पाति का पंखयुक्त होकर वानरों को उत्साहित करके उड़ जाना और वानरों का वहाँ से दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  4.63.12-13h 
सर्वथा क्रियतां यत्न: सीतामधिगमिष्यथ॥ १२॥
पक्षलाभो ममायं व: सिद्धिप्रत्ययकारक:।
 
 
अनुवाद
'हे वानरों! तुम अपना भरसक प्रयत्न करो। तुम्हें सीता के दर्शन अवश्य होंगे। मेरे पंख लगने से तुम्हें विश्वास हो जाएगा कि तुम अपने कार्य में सफल होगे।'
 
‘O monkeys! You try your best. You will definitely get to see Sita. My getting wings will give you confidence that you will succeed in your task.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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