श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 62: निशाकर मुनि का सम्पाति को सान्त्वना देते हुए उन्हें भावी श्रीरामचन्द्रजी के कार्य में सहायता देने के लिये जीवित रहने का आदेश देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.62.7 
सा च कामै: प्रलोभ्यन्ती भक्ष्यैर्भोज्यैश्च मैथिली।
न भोक्ष्यति महाभागा दु:खमग्ना यशस्विनी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'मिथिला की पुत्री सीता अत्यन्त यशस्वी और सौभाग्यशाली होगी। यद्यपि राक्षसराज उसे सब प्रकार के भोग और भोजन प्रदान करेंगे, किन्तु वह उन्हें स्वीकार नहीं करेगी और अपने पति के लिए चिन्तित होकर दुःख में डूबी रहेगी।
 
‘Sita, the daughter of Mithila, will be very famous and fortunate. Although the demon king will offer her all kinds of pleasures and eatables, she will not accept them and will remain worried for her husband and will be immersed in sorrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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