Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.61.8: ‘पहाड़ों के कारण भूमि ऐसी प्रतीत होती थी मानो उस पर पत्थर बिछाए गए हों और नदियों से ढकी हुई भूमि ऐसी प्रतीत होती थी मानो उस पर सूत लपेटे गए हों ॥8॥   |   ramayan सर्ग 4.61: सम्पाति का निशाकर मुनि को अपने पंख के जलने का कारण बताना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 61: सम्पाति का निशाकर मुनि को अपने पंख के जलने का कारण बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.61.8 
उपलैरिव संछन्ना दृश्यते भू: शिलोच्चयै:।
आपगाभिश्च संवीता सूत्रैरिव वसुंधरा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘पहाड़ों के कारण भूमि ऐसी प्रतीत होती थी मानो उस पर पत्थर बिछाए गए हों और नदियों से ढकी हुई भूमि ऐसी प्रतीत होती थी मानो उस पर सूत लपेटे गए हों ॥8॥
 
‘Because of the mountains the land looked as if stones were spread over it and the land covered by rivers looked as if cotton threads were wrapped around it. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)