श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.6.26 
हरता मैथिलीं येन मां च रोषयता ध्रुवम्।
आत्मनो जीवितान्ताय मृत्युद्वारमपावृतम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मैथिली का अपहरण करके और मेरा क्रोध बढ़ाकर उस राक्षस ने निश्चय ही अपने जीवन का अंत करने के लिए मृत्यु का द्वार खोल दिया है॥ 26॥
 
By abducting Maithili and increasing my anger that demon has certainly opened the door of death to end his life.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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