श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  4.6.23-24 
ततस्तु राघवो वाक्यं सुग्रीवमिदमब्रवीत्॥ २३॥
ब्रूहि सुग्रीव कं देशं ह्रियन्ती लक्षिता त्वया।
रक्षसा रौद्ररूपेण मम प्राणप्रिया हृता॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तब श्री रघुनाथजी सुग्रीव से इस प्रकार बोले - 'सुग्रीव! तुमने देखा, अब बताओ कि वह भयंकर रूप वाला राक्षस मेरी प्रिय सीता को किस दिशा में ले गया है॥ 23-24॥
 
Then Shri Raghunathji spoke to Sugreeva in this manner - 'Sugreeva! You have seen, tell me in which direction that fearsome looking demon has taken my beloved Sita.॥ 23-24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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