| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन » श्लोक 22-23h |
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| | | | श्लोक 4.6.22-23h  | एवमुक्तस्तु रामेण लक्ष्मणो वाक्यमब्रवीत्।
नाहं जानामि केयूरे नाहं जानामि कुण्डले॥ २२॥
नूपुरे त्वभिजानामि नित्यं पादाभिवन्दनात्। | | | | | | अनुवाद | | श्री राम की यह बात सुनकर लक्ष्मण बोले, "भैया! मैं इन कंगनों को नहीं पहचानता, न ही यह समझ पाता हूँ कि ये किसके कुंडल हैं; परन्तु चूँकि मैं प्रतिदिन अपनी भाभी के चरणों में प्रणाम करता हूँ, इसलिए मैं इन दोनों नूपुरों को अवश्य पहचानता हूँ।" | | | | On hearing this from Shri Ram, Lakshmana said, "Brother! I do not know these bracelets, nor can I understand whose earrings they are; but since I bow down to my sister-in-law's feet every day, I certainly recognize these two anklets." | | ✨ ai-generated | | |
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