श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.6.21 
शाद्वलिन्यां ध्रुवं भूम्यां सीतया ह्रियमाणया।
उत्सृष्टं भूषणमिदं तथा रूपं हि दृश्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ये आभूषण, जो राक्षस द्वारा हरण किए जाने पर सीता ने त्याग दिए थे, घास वाली भूमि पर गिर गए होंगे; क्योंकि वे जैसे थे वैसे ही प्रतीत होते हैं - टूटे नहीं हैं।॥21॥
 
These ornaments, which were abandoned by Sita when she was abducted by the demon, must have fallen on the grassy ground; because they appear to be in the same condition as they were - they are not broken.'॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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