श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.6.19 
अविच्छिन्नाश्रुवेगस्तु सौमित्रिं प्रेक्ष्य पार्श्वत:।
परिदेवयितुं दीनं राम: समुपचक्रमे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उनके आँसुओं का प्रवाह रुका नहीं। अपने पास खड़े सुमित्रापुत्र लक्ष्मण की ओर देखकर श्रीराम विलाप करते हुए करुण स्वर में बोले-॥19॥
 
The flow of his tears did not stop. Looking at Sumitra's son Lakshman standing near him, Shri Ram said in a pitiable tone while lamenting -॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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