श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  4.6.14-15 
एवमुक्तस्तु सुग्रीव: शैलस्य गहनां गुहाम्।
प्रविवेश तत: शीघ्रं राघवप्रियकाम्यया॥ १४॥
उत्तरीयं गृहीत्वा तु स तान्याभरणानि च।
इदं पश्येति रामाय दर्शयामास वानर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सुग्रीव भगवान राम को प्रसन्न करने की इच्छा से तुरन्त ही पर्वत की एक गहरी गुफा में चले गए और चादर तथा उन आभूषणों को लेकर बाहर आ गए। बाहर आकर वानरराज ने वे सब आभूषण भगवान राम को दिखाते हुए कहा, 'यह लो, यह देखो।' ॥14-15॥
 
On hearing this, Sugreeva immediately went into a deep cave in the mountain with the desire to please Lord Rama and came out with the sheet and those ornaments. Coming out, the monkey king showed all those ornaments to Lord Rama saying, 'Take this, see this'. ॥14-15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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