श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.6.13 
तमब्रवीत् ततो राम: सुग्रीवं प्रियवादिनम्।
आनयस्व सखे शीघ्रं किमर्थं प्रविलम्बसे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब श्री राम ने अपनी प्रिय कथा सुना रहे सुग्रीव से कहा, 'मित्र! शीघ्र लाओ, विलम्ब क्यों कर रहे हो?'
 
Then Shri Ram said to Sugreeva, who was telling this favourite story, 'Friend! Bring it quickly, why are you delaying?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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