श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.6.12 
तान्यस्माभिर्गृहीतानि निहितानि च राघव।
आनयिष्याम्यहं तानि प्रत्यभिज्ञातुमर्हसि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
रघुनंदन! वो सब चीज़ें हमने रख ली हैं। मैं अभी लाता हूँ, तुम पहचान लेना।'
 
Raghunandan! We have kept all those things. I will bring them now, you can identify them.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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