श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 6: सुग्रीव का श्रीराम को सीताजी के आभूषण दिखाना तथा श्रीराम का शोक एवं रोषपूर्ण वचन  »  श्लोक 1-2h
 
 
श्लोक  4.6.1-2h 
पुनरेवाब्रवीत् प्रीतो राघवं रघुनन्दनम्।
अयमाख्याति ते राम सचिवो मन्त्रिसत्तम:॥ १॥
हनुमान् यन्निमित्तं त्वं निर्जनं वनमागत:।
 
 
अनुवाद
सुग्रीव ने पुनः प्रसन्नतापूर्वक रघुकुल के पुत्र श्री रामचन्द्र से कहा - 'श्रीराम! मेरे मन्त्रियों में श्रेष्ठ हनुमान्‌जी ने आपके विषय में वह सब वृत्तान्त मुझसे कह दिया है, जिसके कारण आपको इस निर्जन वन में आना पड़ा।॥1 1/2॥
 
Sugreeva again happily said to Shri Ramchandra, the son of the Raghukul - 'Shri Ram! Hanuman, the best of my ministers, has already told me the entire story about you, because of which you had to come to this deserted forest. ॥1 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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