श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.58.23 
रावणान्त:पुरे रुद्धा राक्षसीभि: सुरक्षिता।
जनकस्यात्मजां राज्ञस्तस्यां द्रक्ष्यथ मैथिलीम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
रावण अपने अन्तःपुर में नजरबंद है। अनेक राक्षसियाँ उसकी रक्षा के लिए तैनात हैं। वहाँ पहुँचने पर तुम राजा जनक की पुत्री मैथिली सीता के दर्शन कर सकोगे॥ 23॥
 
‘Ravana is under house arrest in his inner palace. Many demonesses are deployed to guard him. On reaching there you will be able to see Maithili Sita, daughter of King Janaka.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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