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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना
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श्लोक 18
श्लोक
4.58.18
तां तु सीतामहं मन्ये रामस्य परिकीर्तनात्।
श्रूयतां मे कथयतो निलयं तस्य रक्षस:॥ १८॥
अनुवाद
'श्री राम का नाम लेने से मैं समझ गया कि वह सीता थी। अब मैं तुम्हें उस राक्षस के घर का पता बताता हूँ, सुनो।॥18॥
‘By taking the name of Shri Ram, I understand that it was Sita. Now I will tell you the address of that demon's house, listen.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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