श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.58.10 
अदीर्घदर्शिनं तं वै रावणं राक्षसाधमम्।
अन्तिके यदि वा दूरे यदि जानासि शंस न:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह अदूरदर्शी दुष्ट राक्षस रावण यहां से दूर है या निकट, यदि आपको पता है तो कृपया हमें उसका पता बताइये।'
 
Whether that short-sighted evil demon Ravana is near or far from here, if you know then please tell us his whereabouts.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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