श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 55: अङ्गद सहित वानरों का प्रायोपवेशन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.55.8 
राज्ये पुत्र: प्रतिष्ठाप्य: सगुणो निर्गुणोऽपि वा।
कथं शत्रुकुलीनं मां सुग्रीवो जीवयिष्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जो सुग्रीव यह विश्वास रखते हैं कि मेरा पुत्र गुणवान हो या गुणहीन, उसे ही सिंहासन पर बिठाना चाहिए, वे मुझ शत्रुकुल में उत्पन्न बालक को कैसे जीवित रहने देंगे?' 8॥
 
How will Sugriva, who has the belief that whether his son is virtuous or devoid of virtue, he should be placed on the throne, let me, a child born in an enemy family, live?' 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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