श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 55: अङ्गद सहित वानरों का प्रायोपवेशन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.55.12 
अहं व: प्रतिजानामि न गमिष्याम्यहं पुरीम्।
इहैव प्रायमासिष्ये श्रेयो मरणमेव मे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं आप सब से प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं किष्किन्धपुरी नहीं जाऊँगा। मैं यहाँ मृत्युपर्यन्त उपवास करूँगा। मेरे लिए मर जाना ही अच्छा है॥12॥
 
I promise you all that I will not go to Kishkindapuri. I will fast here till death. It is better for me to die.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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