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श्लोक 4.55.12  |
अहं व: प्रतिजानामि न गमिष्याम्यहं पुरीम्।
इहैव प्रायमासिष्ये श्रेयो मरणमेव मे॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| मैं आप सब से प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं किष्किन्धपुरी नहीं जाऊँगा। मैं यहाँ मृत्युपर्यन्त उपवास करूँगा। मेरे लिए मर जाना ही अच्छा है॥12॥ |
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| I promise you all that I will not go to Kishkindapuri. I will fast here till death. It is better for me to die.॥ 12॥ |
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