श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 55: अङ्गद सहित वानरों का प्रायोपवेशन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.55.10 
उपांशुदण्डेन हि मां बन्धनेनोपपादयेत्।
शठ: क्रूरो नृशंसश्च सुग्रीवो राज्यकारणात्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव दुष्ट, क्रूर और निर्दयी है। राज्य के हित के लिए वह मुझे गुप्त रूप से दण्ड देगा अथवा सदा के लिए बंदी बना लेगा।॥10॥
 
Sugreeva is wicked, cruel and ruthless. For the sake of the kingdom he will punish me secretly or put me in captivity forever.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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