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श्लोक 4.54.2  |
बुद्ध्या ह्यष्टाङ्गया युक्तं चतुर्बलसमन्वितम्।
चतुर्दशगुणं मेने हनूमान् वालिन: सुतम्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| हनुमान जी यह भली-भाँति जानते थे कि वालिकुमार अंगद आठ प्रकार की बुद्धि, चार प्रकार के बल और चौदह प्रकार के गुणों से संपन्न हैं॥2॥ |
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| Hanuman ji knew very well that Valikumar Angad was blessed with eight 1-type intelligence, four 2-type strength and fourteen 3-type virtues. 2॥ |
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