श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.54.12 
विगृह्यासनमप्याहुर्दुर्बलेन बलीयसा।
आत्मरक्षाकरस्तस्मान्न विगृह्णीत दुर्बल:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
बलवान पुरुष का दुर्बल पुरुष से युद्ध करके चुप रहना संभव है। किन्तु दुर्बल पुरुष बलवान पुरुष से शत्रुता करके कहीं भी सुखपूर्वक नहीं रह सकता। अतः रक्षा चाहने वाले दुर्बल पुरुष को बलवान पुरुष से युद्ध नहीं करना चाहिए - ऐसा बुद्धिमान पुरुषों का कथन है।॥12॥
 
‘It is possible for a strong man to remain silent after fighting with a weak man. But a weak man cannot live happily anywhere after making enmity with a strong man. Therefore, a weak man who wants to be protected should not fight with a strong man – this is the statement of wise men.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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