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श्लोक 4.53.19  |
किं मे सुहृद्भिर्व्यसनं पश्यद्भिर्जीवितान्तरे।
इहैव प्रायमासिष्ये पुण्ये सागररोधसि॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| "मेरे उन मित्रों से मेरा क्या लेना-देना, जिन्होंने मेरे जीवनकाल में राजा के हाथों मेरी मृत्यु देखी थी? यहाँ समुद्र के पवित्र तट पर मैं मृत्युपर्यन्त उपवास करूँगा।" ॥19॥ |
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| "What have I to do with my friends who witnessed my death at the hands of the king during my lifetime? Here on the sacred shore of the sea I will fast till my death." ॥19॥ |
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