श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 53: लौटने की अवधि बीत जाने पर भी कार्य सिद्ध न होने के कारण सुग्रीव के कठोर दण्ड से डरने वाले अङ्गद आदि वानरों का उपवास करके प्राण त्याग देने का निश्चय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.53.14 
तीक्ष्ण: प्रकृत्या सुग्रीव: स्वामिभावे व्यवस्थित:।
न क्षमिष्यति न: सर्वानपराधकृतो गतान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव स्वभाव से ही कठोर हैं। इस समय वे हमारे राजा हैं। यदि हम कोई अपराध करके उनके पास जाएँ, तो वे हमें कभी क्षमा नहीं करेंगे॥14॥
 
Sugreeva is harsh by nature. At present he is our king. If we commit a crime and go to him, he will never forgive us.॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd