श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.52.9 
विचित्य तु वनं सर्वं समुद्रं दक्षिणां दिशम्।
वयं बुभुक्षिता: सर्वे वृक्षमूलमुपाश्रिता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हमने यहाँ का सारा वन छान मारा है। अब हमें दक्षिण दिशा में समुद्र में उनकी खोज करनी है। अभी तक सीता का कोई पता नहीं चला है और हम भूख-प्यास से पीड़ित हैं। अन्त में हम सब थककर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए॥9॥
 
We have searched the entire forest here. Now we have to search for her in the ocean in the south. Till now we have not found any trace of Sita and we are suffering from hunger and thirst. Finally all of us sat down under a tree in exhaustion.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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