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ramayan 4.52.30-31h: तत्पश्चात् उस धर्मनिष्ठ तपस्वी ने उस विचित्र गुफासे निकले हुए समस्त वानरोंको आश्वासन देते हुए इस प्रकार कहा - 30 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  4.52.30-31h 
उवाच सर्वांस्तांस्तत्र तापसी धर्मचारिणी॥ ३०॥
नि:सृतान् विषमात् तस्मात् समाश्वास्येदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस धर्मनिष्ठ तपस्वी ने उस विचित्र गुफासे निकले हुए समस्त वानरोंको आश्वासन देते हुए इस प्रकार कहा - 30 1/2॥
 
After that, that devout ascetic gave assurance to all the monkeys who had come out of that strange cave and said thus - 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)