श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  4.52.27-28h 
निमीलयत चक्षूंषि सर्वे वानरपुङ्गवा:॥ २७॥
नहि निष्क्रमितुं शक्यमनिमीलितलोचनै:।
 
 
अनुवाद
‘श्रेष्ठ वानरों! तुम सब लोग अपनी आँखें बंद कर लो। बिना आँखें बंद किए यहाँ से निकलना असम्भव है।’॥27 1/2॥
 
‘Excellent monkeys! All of you close your eyes. It is impossible to get out of here without closing your eyes.’॥ 27 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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