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श्लोक 4.52.27-28h  |
निमीलयत चक्षूंषि सर्वे वानरपुङ्गवा:॥ २७॥
नहि निष्क्रमितुं शक्यमनिमीलितलोचनै:। |
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| अनुवाद |
| ‘श्रेष्ठ वानरों! तुम सब लोग अपनी आँखें बंद कर लो। बिना आँखें बंद किए यहाँ से निकलना असम्भव है।’॥27 1/2॥ |
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| ‘Excellent monkeys! All of you close your eyes. It is impossible to get out of here without closing your eyes.’॥ 27 1/2॥ |
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