Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.52.25-27h: हनुमान की यह बात सुनकर तपसी बोली, 'मैं समझती हूँ कि जो भी इस गुफा में एक बार प्रवेश कर जाता है, उसका जीवित लौटना बहुत कठिन हो जाता है। फिर भी, नियमों का पालन करके और तपस्या के शुभ प्रभाव से मैं आप सभी वानरों को इस गुफा से बाहर निकाल लाऊँगी।'   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 25-27h
 
 
श्लोक  4.52.25-27h 
एवमुक्ता हनुमता तापसी वाक्यमब्रवीत्॥ २५॥
जीवता दुष्करं मन्ये प्रविष्टेन निवर्तितुम्।
तपस: सुप्रभावेण नियमोपार्जितेन च॥ २६॥
सर्वानेव बिलादस्मात् तारयिष्यामि वानरान्।
 
 
अनुवाद
हनुमान की यह बात सुनकर तपसी बोली, 'मैं समझती हूँ कि जो भी इस गुफा में एक बार प्रवेश कर जाता है, उसका जीवित लौटना बहुत कठिन हो जाता है। फिर भी, नियमों का पालन करके और तपस्या के शुभ प्रभाव से मैं आप सभी वानरों को इस गुफा से बाहर निकाल लाऊँगी।'
 
On hearing Hanuman say this, Tapasi said, 'I understand that whoever enters this cave once, it becomes very difficult for him to return alive. However, by following the rules and by the good effect of penance, I will get all of you monkeys out of this cave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)