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ramayan 4.52.24-25h: धर्मचारिणी! हमें जो महान कार्य करना था, वह इस गुफा में रहने के कारण हम नहीं कर पाए हैं।'   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  4.52.24-25h 
महच्च कार्यमस्माभि: कर्तव्यं धर्मचारिणि॥ २४॥
तच्चापि न कृतं कार्यमस्माभिरिह वासिभि:।
 
 
अनुवाद
धर्मचारिणी! हमें जो महान कार्य करना था, वह इस गुफा में रहने के कारण हम नहीं कर पाए हैं।'
 
Dharmacharini! The great work that we had to do, we have not been able to do it because of living in this cave.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)