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ramayan 4.52.20-21h: जब तपस्वी स्त्री ने ऐसी धर्म से भरी हुई अच्छी बात कही, तब हनुमान जी ने निर्दोष नेत्रों से उस देवी से कहा- ॥20 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  4.52.20-21h 
एवमुक्त: शुभं वाक्यं तापस्या धर्मसंहितम्॥ २०॥
उवाच हनुमान् वाक्यं तामनिन्दितलोचनाम्।
 
 
अनुवाद
जब तपस्वी स्त्री ने ऐसी धर्म से भरी हुई अच्छी बात कही, तब हनुमान जी ने निर्दोष नेत्रों से उस देवी से कहा- ॥20 1/2॥
 
When the ascetic lady said such a good thing full of righteousness, then Hanuman ji said to that goddess with innocent eyes - ॥20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)