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श्लोक 4.52.2  |
वानरा यदि व: खेद: प्रणष्ट: फलभक्षणात्।
यदि चैतन्मया श्राव्यं श्रोतुमिच्छामि तां कथाम्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| ‘वानरों! यदि फल खाने से तुम्हारी थकान दूर हो गई हो और तुम्हारी कथा सुनने योग्य हो, तो मैं उसे सुनना चाहूँगा।’॥2॥ |
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| ‘Monkeys! If eating the fruit has relieved your fatigue and if your story is worth listening to, then I would like to hear it.’॥ 2॥ |
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