श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.52.2 
वानरा यदि व: खेद: प्रणष्ट: फलभक्षणात्।
यदि चैतन्मया श्राव्यं श्रोतुमिच्छामि तां कथाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘वानरों! यदि फल खाने से तुम्हारी थकान दूर हो गई हो और तुम्हारी कथा सुनने योग्य हो, तो मैं उसे सुनना चाहूँगा।’॥2॥
 
‘Monkeys! If eating the fruit has relieved your fatigue and if your story is worth listening to, then I would like to hear it.’॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd