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ramayan 4.52.19-20h: मैं तुम सब वेगवान वानरों पर पहले से ही बहुत प्रसन्न हूँ। धर्म-कर्म में लगे रहने के कारण मुझे किसी की आवश्यकता नहीं है।॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  4.52.19-20h 
सर्वेषां परितुष्टास्मि वानराणां तरस्विनाम्॥ १९॥
चरन्त्या मम धर्मेण न कार्यमिह केनचित्।
 
 
अनुवाद
मैं तुम सब वेगवान वानरों पर पहले से ही बहुत प्रसन्न हूँ। धर्म-कर्म में लगे रहने के कारण मुझे किसी की आवश्यकता नहीं है।॥19 1/2॥
 
I am already very pleased with all you swift monkeys. Due to being engaged in religious rituals, I have no need for anyone.'॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)