श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  4.52.17-18h 
यत् त्वया रक्षिता: सर्वे म्रियमाणा बुभुक्षया॥ १७॥
ब्रूहि प्रत्युपकारार्थं किं ते कुर्वन्तु वानरा:।
 
 
अनुवाद
‘देवी! हम लोग भूख से मर रहे थे। आपने हम सबके प्राण बचाए। अतः आप बताइए कि आपकी कृपा का बदला चुकाने के लिए ये वानरों को क्या सेवा करनी चाहिए।’॥17 1/2॥
 
‘Goddess! We were dying of hunger. You saved the lives of all of us. So tell us what service should these monkeys do to repay your kindness.’॥ 17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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